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Some words on

“Śrī Śrī Bhāgavata Patrikā”

Monthly Hindi Magazine

O
n November 1931, the foremost among paramhaṁsas, jagad-guru oṁ viṣṇupāda Śrī Śrīmad Bhaktisiddhānta Sarasvatī Ṭhākura ‘Prabhupāda’ started the publication of a fortnightly journal named ‘Bhāgavata’. His purpose was to initiate in the Hindi language the flowing stream of teachings of the topmost dharma. This magazine was regularly published fortnightly for several years and was then discontinued.

Śrī Śrī Bhāgavata Patrikā - latest

  • 27 February 2021
  • 02 January 2021
  • 13 December 2020
  • 02 September 2020

    माला किस समुचित पद्धतिसे समर्पितकी जाती है,मैं तुम्हें इसकी शिक्षा दूॅंगा।

    श्रील गुरुदेव-स्मरण-मंगल-कणिकाएं
    वर्ष—१७ • संख्या—१-३ • प्रबन्ध क्रमांक—९

  • 20 August 2020

    जिस प्रकार अनजानेमें या जानबुझकर यदि कोई व्यक्ति कुसंगके प्रति आसक्त होकर कुसंग करता है,तो कुसंग का फल अवश्य ही उस व्यक्तिमें परिस्फुट होगा। उसी प्रकार यदि कोई व्यक्ति साधुके प्रति आसक्त होकर साधुसंग करता है,तो साधुसंगकी जो महिमा है,वह उस व्यक्तिमें अवश्य प्रवेश करेगी।

    वर्ष—१७ • संख्या—१-३ • प्रबन्ध क्रमांक—८
    हमारा एक परम-बान्धव अवश्य होना चाहिए
    श्रील भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराजके हरिकथामृत-सिन्धुका एक बिन्दु

  • 08 August 2020

    सामाजिक कुसंस्कारोंसे, सामाजिक उत्पीड़नसे उठकर महिलाएं दया, परोपकार सत्पंथपरता, वात्सल्य-भाव आदि भारतीय प्राचीन संस्कृतिके अनुरूप सद्गुणों से विभूषित होकर सीता, सावित्री, द्रौपदीके समान बन सके-ऐसा प्रयास कर सको तो अच्छा है।

    वर्ष—१७ • संख्या—१-३ • प्रबन्ध क्रमांक—७
    तुम्हारा जीवन भार न होकर सर्वप्रकारसे सुखमय एवं सार्थक हो
    श्रील भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराजके पत्रामृत

  • 02 August 2020

    'उडु' अर्थात् नक्षत्र एवं 'प'अर्थात पति, अतः उडुप अर्थात् नक्षत्रपति चन्द्र। चन्द्रकी तपस्यासे प्रसन्न रुद्र-देवताके अधिष्ठान-क्षेत्र के रूप में यह स्थान 'उडुपी' नाम से प्रसिद्ध है।

    वर्ष—१७ • संख्या—१-३ • प्रबन्ध क्रमांक—६
    श्रीगौड़ीय-पत्रिकाका सत्ताइसवाँ वर्ष
    श्रील भक्तिवेदान्त वामन गोस्वामी महाराज वाणी-वैभव

  • 02 August 2020

    तुम सर्वदा ही सत्यकथाके प्रचारमें व्रती रहना। सत्साहयुक्त व्यक्तियोंकी भगवान् ही सहायता करते हैं। समस्त संसारके द्वारा असत्पथपर चलने पर भी हम उसकी दासता नहीं करेंगे।

    वर्ष—१७ • संख्या—१-३ • प्रबन्ध क्रमांक—५
    श्रीमन्महाप्रभुकि कथाओंका प्रचार ही वास्तव वदान्यता तथा जीवोंके प्रति दया है
    श्रीश्रीमद्भक्तिप्रज्ञान केशव गोस्वामी महाराजकी पत्रावली (पत्र-१५)

  • 01 August 2020

    जो स्वयंको वैष्णव मानता है वह branded अवैष्णव है।जो अपनेको गुरु या श्रेष्ठ मानते हैं, वे गुरु होने के योग्य नहीं हैं। जो अपनेको शिष्य का शिष्य मानते हैं, केवल वे ही गुरु होनेके योग्य हैं।

    वर्ष—१७ • संख्या—१-३ • प्रबन्ध क्रमांक—४
    श्रीगुरुतत्त्व और श्रील प्रभुपाद (२)
    श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर 'प्रभुपाद' का वाणी-वैभव

  • 31 July 2020

    जो संसाररूप मृत्युसे मेरी रक्षा करते हैं, वे ही गुरुपादपद्म है।'मैं मर जाऊॅंगा'-इस भयसे, इस आशंकासे जो मेरा उद्धार कर सकते हैं, वे ही सद्गुरु हैं।

    वर्ष—१७ • संख्या—१-३ • प्रबन्ध क्रमांक—३
    श्रीगुरुतत्त्व और श्रील प्रभुपाद (१)
    श्रील भक्तिसिद्धान्त सरस्वती ठाकुर 'प्रभुपाद' का वाणी-वैभव

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